उद्देश्य

स्वदेशी गुरुकुलम् की स्थापना विक्रम संवत् 2070 कार्तिक कृष्ण षष्ठी (25 अक्टुबर 2013 ई.) को निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए की गई।

  • संपूर्ण भारतवर्ष में गौहत्या बंद करवाकर युवाओं को गौमाता के माध्यम से आरोग्य एवं अर्थ अर्जित करने की शिक्षा प्रदान करना।
  • संपूर्ण भारतवर्ष के विद्यार्थियों को पुन: गुरुकुल परंपरा पर आधारित भारतीय शिक्षण व्यवस्था में लाकर, उच्च शिक्षा का स्वदेशीकरण अर्थात् भारतीयकरण करना।
  • उच्च शिक्षा को संस्कृत, हिंदी, मराठी, तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम, उड़ीया, गुजराती, पंजाबी, बांग्ला आदि सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करवाना। उच्च शिक्षा में अंग्रेजी भाषा की माध्यम के रुप में अनिवार्यता समाप्त करवा कर उसे केवल विषय तक सीमित करना।
  • प्रत्येक भारतीय को भारत की सभी भाषाएं सिखने का अवसर देने हेतु पाठ्यक्रम आरंभ करना।
  • जाति, धर्म, वर्ण, वर्ग, आयु, क्षेत्र अथवा औपचारिक शैक्षिक योग्यता पर विचार किए बिना, भारतीय गुरुकुल पद्धति में शिक्षा पाने के इच्छुक सभी विधार्थियों को उच्च कोटि की शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना।
  • स्वदेशी उद्योग एवं व्यवसाय को मूल में रखकर, आवश्यकता पर आधारित शिक्षा पाठ्यक्रम प्रदान करना।
  • भारत में गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुन: प्रचारित एवं प्रसारित करना।
  • भारत की प्राचीन एवं श्रेष्ठ चिकित्सा पद्धतियों, योग, प्राणायाम आदि की विभिन्न पाठ्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षा प्रदान करना।
  • भारत की प्राचीन पाककला अर्थात् रसोईघर विज्ञान की सही शिक्षा प्रदान करना क्योंकि वर्तमान समय में रोगों का एक मुख्य कारण पश्चिमी भोजनशैली एवं विकृत रसोई विज्ञान भी है।
  • आयुर्वेद आधारित सात्विक दिनचर्या, ऋतुचर्या एवं ब्रम्हचर्य का शिक्षा के रुप में ज्ञान देना। जिससे वर्तमान समय की मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक विकृतियों को दूर किया जा सकें।
  • भारत के कृषक भाईयों को पूर्ण प्राकृतिक एवं रसायन मुक्त वैदिक कृषि की शिक्षा प्रदान करना।
  • विभिन्न प्रकार के गृह उद्योग एवं उच्च तकनीक उद्योग स्थापित करने की शिक्षा पाठ्यक्रम के रुप में प्रदान करना|
  • भारतीय शास्त्रीय गीत, संगीत, नृत्य, वाद्ययंत्रों आदि की पाठ्यक्रम के रुप में शिक्षा देना।
  • भारतीय कलाओं जैसे चित्रकला, मूर्तिकला आदि की पाठ्यक्रम के रुप में शिक्षा देना।
  • भारतीय बर्तन निर्माण कला को विशेष रुप से प्रोत्साहित करते हुए इसकी पाठ्यक्रम के रुप में शिक्षा देना।
  • भारतीय खेलों को प्रोत्साहित करने हेतु गुरुकुल के अंतर्गत अधिक से अधिक भारतीय खेलों को सिखाने की श्रेष्ठतम व्यवस्था करवाना।
  • भारत की खादी एवं अन्य वस्त्र निर्माण तकनीक की शिक्षा प्रदान करना तथा इसके प्रोत्साहन एवं वैज्ञानिक लाभों की सामाजिक जागृति के लिए स्वदेशी गुरुकुलम् के सभी विद्यार्थियों एवं स्वदेशी मंदिर के अंतर्गत आने वाले सभी साथियों के लिए हस्तनिर्मित भारतीय पोषाक पहनना अनिवार्य करना।
  • इस प्रकार गौ-धर्म-राष्ट्र रक्षार्थ स्वदेशी गुरुकुलम् द्वारा अपने उद्देश्यों में वृद्धि की जा सकती है। और उन्हें पूरा करने के लिए हम सभी तन-मन-धन से संकल्पबद्ध हैं।

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