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स्वदेशी गुरुकुलम् की स्थापना अमर बलिदानी श्री राजीव भाई दीक्षित की प्रेरणा से विक्रम संवत् 2070 कार्तिक कृष्ण षष्ठी (25 अक्टुबर 2013 ई.) को भारतवर्ष की प्राचीन शिक्षा नगरी अवंतिका (वर्तमान उज्जैन) में हुई। बाबा महाकालेश्वर की नगरी एवं योगेश्वर श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन का आध्यात्म के साथ-साथ शिक्षा एवं विज्ञान के क्षेत्र में भी इतिहास लाखों वर्ष पुराना है जिसका उल्लेख हमारे विभिन्न ऐतिहासिक ग्रंथों में जानने को मिलता है।

स्वतंत्र भारत के महान क्रांतिकारी विचारक तथा हमारे गुरु एवं प्रेरणास्त्रोत अमर बलिदानी श्री राजीव भाई दीक्षित की प्रेरणा से ऐसी ऐतिहासिक एवं पवित्र धरा पर एक ऐसे शिक्षण केंद्र की नींव रखने का विचार हमें आया जिसके माध्यम से हम संपूर्ण भारतवर्ष में पुन: भारतीय शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल परंपरा को स्थापित कर सकें। स्वदेशी गुरुकुलम् इसी दिशा में उठाया गया कदम है। आज से लगभग 200 वर्ष पूर्व अंग्रेजों द्वारा हमारे देश के 7 लाख से अधिक उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले गुरुकुलों को कानून बनाकर नष्ट करके उनके कुलपति, प्राचार्यों, आचार्यों आदि की हत्या की गई थी और इस तरह अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा पद्धति की गुरुकुल परंपरा को समाप्त कर दिया था। अंग्रेजों द्वारा किया गया वह दुष्कृत्य आज भी भारत के शिक्षा इतिहास का काला अध्याय बना हुआ है क्योंकि इस दुष्कृतय के बाद एक अंग्रेज अधिकारी लार्ड टी.बी. मैकॉले ने भारत में एक ऐसे शिक्षा तंत्र (इंडियन एज्यूकेशन सिस्टम) को जन्म दिया जिसका उद्देश्य भारत की आने वाली पीढ़ियों को हमेशा के लिए अपना मानसिक गुलाम बनाना था। आज हमारा राष्ट्र उसी षड़यंत्र के अंतर्गत भाषा, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, कानून, उद्योग, व्यापार, विचार आदि प्रत्येक स्तर पर अंग्रेजियत अथवा विदेशियत का गुलाम हो चूका है। आज भी हमारे देश में उच्च शिक्षा एवं न्याय मातृभाषा में प्राप्त नहीं किया जा सकता वह केवल अंग्रेजी में दिया जाता है, विज्ञान एवं तकनीक के नाम पर विदेशी कचरा हमारे देश में डाला जा रहा है, पूरा राष्ट्र रोगी होकर विदेशी कंपनियों की दवाईयां खाकर दिन काट रहा है, स्वदेशी उद्योग को नष्ट किया जा चूका है, व्यापार विदेशी कंपनियों के हाथों में है और हमारे युवाओं को केवल नौकरी करने के लिए तैयार किया जा रहा है। तथाकथित स्वतंत्रता के बाद भी इन सभी समस्याओं के व्याप्त होने का एक मूल कारण है कि आज भी हमारे देश के युवा इस विदेशी शिक्षण पद्धति में पढ़ते हुए मानसिक रुप से गुलाम हो चूके है। वे अपनी भाषा, संस्कृति, ज्ञान, चिकित्सा, विज्ञान, इतिहास, तकनीक आदि सभी से दूर हो गए है और उसमें विश्वास नहीं रखते।

स्वदेशी गुरुकुलम् सभी धर्म, जाति, वर्ग, वर्ण, शिक्षा स्तर के लोगों को भारतीय शिक्षा प्रदान करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा। उन्हें रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा। स्वदेशी गुरुकुलम् देश की सभी समस्याओं को शिक्षा के माध्यम से मिटा कर भारत के युवाओं को अपने गौरवमयी इतिहास, परंपरा एवं संस्कृति से जोड़ते हुए भाषा, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, उद्योग, व्यापार आदि क्षेत्रों में भारतीय, सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाएगा। भारत को पुन: स्वदेशी, स्वावलंबी, स्वाभिमानी, सामर्थ्यवान, समृद्ध, निरोगी बना कर विश्वगुरु बनाना यही स्वदेशी गुरुकुलम् का स्पष्ट उद्देश्य है और इसे पूरा करने के लिए हम कृतसंकल्पित है।


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